
ब्राह्मण लड़की से की थी दूसरी शादी और कहां पत्नी की शिव भक्ति के कारण ही 10 वर्ष अधिक जीविन जिया।
अबेडकर में कभी नहीं अपनाया बौद्ध धर्म
आज हम अंबेडकर जी की 132 वी जयंती मना रहे हैं तो उनके विषय में मैं आपको सच बताना चाहूंगा क्योंकि समाज में बहुत सारी भ्रांतियां ज्ञान के अभाव में फैली हुई है जो देश विरोधी तत्व हैं वे इनका लाभ उठाकर समाज में फूट डालने का प्रयास कर रहे हैं राजनीतिज्ञ लाभ के लिए एवं वोट बैंक की राजनीति के लिए अपने-अपने तर्क अनुसार तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जाता है जिसका फायदा राजनीतिक पार्टियां बखूबी उठा रहे हैं लेकिन सत्य से अवगत कराना हमारा कर्तव्य है जिसमें से प्रथम पहलू है
अंबेडकर ने कभी नहीं अपनाया बौद्ध धर्म
वे समाज में पिछड़ी जातियों के लिए बहुत चिंतित है किंतु उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा कि धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाया वे कहते थे कि पढ़ो लिखो और ब्राह्मण बने ब्राह्मण कोई जाति से नहीं बल्कि ज्ञानी ब्राह्मण जो ज्ञान ब्राह्मणों को प्राप्त है वह उससे पिछड़ा वर्ग एवं दलित समुदाय वंचित ना हो ।
क्योंकि जो जन्म से ब्राह्मण है मैं कर्म से भी ब्राह्मण हो या निश्चित नहीं वाह पिछड़े वर्ग एवं दलित समुदाय के साथ अन्य कर सकता है परंतु ज्ञान प्राप्त कर बना ब्राह्मण ज्ञानी होता है वह समाज में हो रहे भेदभाव को सहन नहीं करता एवं समाज के सद्भावना तथा समानता पर जोर देगा जब दलित समुदाय मैं ज्ञानी ब्राह्मण होंगे तो उनके साथ भी कोई अन्याय नहीं कर सकेगा, जबकि आप ज्ञान के आधार पर समाज में कुछ पदों पर आसीन है या समाज में सहयोग कर रहे हैं एक चिकित्सक के रूप में या इंजीनियर के रूप में एवं अन्य राजकीय पदों में आपका स्थान होगा तब किसी की हिम्मत नहीं होगी आपसे आपकी जाति पूछे।
या आपको जाति बताने का अवसर नहीं होगा वहां तो आपके कर्म ही प्रधान होंगे जाति नहीं
ब्राह्मण लड़की से की शादी
अंबेडकर डॉक्टर शारदा कबीर से काफी समय से परिचित थे वे जब मंगलवार को क्लीनिक से एक साथ कार से वापस आ रहे थे तब अंबेडकर ने अपनी साथियों के विचार उनके सामने रखें या कहीं शादी का प्रपोजल डॉक्टर को दिया उन्होंने कहा
मेरे साथी मेरे लोग मुझ पर या दबाव डाल रहे हैं कि मैं विवाह कर लो लेकिन मेरे लिए यह मुश्किल हो रहा है एक काबिल साथ ही ढूंढना लाखों लोगों के लिए मुझे और जिंदा रहना होगा यही सही होगा कि मैं उन लोगों की विनती को गंभीरता से लें
भीमराव ने इस प्रकार से शादी का प्रपोजल रखा परंतु डॉक्टर शारदा कबीर के मन में यह यह बात जानती थी कि उनके विषय में यह बातें कहीं जाती है अथवा समाज में भ्रांति फैली हुई थी की भीमराव अंबेडकर ब्राह्मणों के विरोधी एवं पूजा पाठ में विश्वास नहीं रखते हैं
इसी कारण उन्होंने कुछ नहीं कहा थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा कि आपका ख्याल रखने वाला कोई होना चाहिए उनका जवाब सुनकर अंबेडकर ने कहा कि आपके साथ ही अपने लिए सही चुनाव की खोज करूंगा
इसके बाद भीमराव अंबेडकर दिल्ली के लिए निकल पड़े कुछ दिन बाद उन्होंने डॉक्टर शारदा कभी कोई चिट्ठी लिखी की
"मेरे विषय में समाज में जो भ्रांतियां हैं और पूर्णरूप से सत्य नहीं है ब्राह्मणों के द्वारा पिछड़ा वर्ग/दलितों पर किए अत्याचार का विरोधी हूं एवं दलित समाज को समाज के समानता के स्तर पर लाने का प्रयास कर रहा है एवं समाज में फैले ढोंग भटूरे और अंधविश्वास , एवं असामाजिक तथा अवैज्ञानिक रीति-रिवाजों को दूर करने का प्रयासरत हूं परंतु में ईश्वर की भक्ति एवं स्तुति का विरोधी नहीं हूं बल्कि इसे आधार बनाकर ब्राह्मणों में जो अत्याचार दलितों पर किए हैं उसका विरोध मे हूं। मेरे और तुम्हारे आयु में अंतर है एवं मेरे स्वास्थ्य के कारण मेरा प्रपोजल अस्वीकृत भी करेंगे तो मैं अपमानित महसूस नहीं करूंगा इस पर मुझे अपनी राय बताना"
इसके दूसरे दिन शारदा कबीर ने हां में जवाब दिया और 15 अप्रैल 1948 को अंबेडकर ने दूसरा विवाह किया शादी के बाद शारदा कबीर को लोग सविता अंबेडकर के नाम जानने लगे जिसका जिक्र सविता अंबेडकर ने अपनी आत्मकथा में किया है
भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मऊ जिले जो कि मध्य प्रदेश में है एक महार परिवार में हुआ। उसने जाति को अछूत माना जाता था। उनके पिता सेना में थे
अंबेडकर की पहली शादी 1906 रमाबाई से हुई थी नाना उनकी पढ़ाई में बहुत मदद की उनके 5 बच्चे में हुए जिनमें से एक यशवंत ही जीवित रहे 27 मई 1935 को बीमारी के कारण रमाबाई की मौत हो गई थी
तबीयत बिगड़ने के चलते बाबा साहब की मुलाकात सविता से हुई
1947 के दिनों में शारदा और भीमराव की मुलाकात हुई थी आगे लिखते हैं कि जब बाबा साहब उनसे मिले तो वह बीमारियों से लड़ रहे थे उनका चलना फिरना मुश्किल था मंगलवार को दौरान यहां इलाज करने आते हैं तभी उनसे मिलते थे इसके पश्चात उनकी बातें चिट्ठियों में आने लगी ।
कुछ समय बाद शादी का प्रपोजल आया और दोनों की शादी हो गई 1953 में जब वह गर्भवती थी तो खून की उल्टी होने के कारण उन्हें चक्कर आने लगे और उनका गर्भपात हो गया जिससे आप बेहद परेशान हो गए उसके बाद उन्होंने अपनी बहन की बेटी को गोद लेने का विचार किया लेकिन ऐसा नहीं हुआ
डॉक्टर सविता की वजह से 10 साल अधिक जीवन जिए
बाबा साहब के जीवन में डॉक्टर सविता का गहरा असर था वे हमेशा राजनीतिक एवं सामाजिक आंदोलनों में उनके साथ रहती कथा एवं उनके सेहत का भी ख्याल रखती है ज अंबेडकर ने अपनी किताब में लिखा है की सविता अंबेडकर की वजह से मैं 9 से 10 साल अधिक जीवन जिया है।
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